खनन व रेत माफिया संपदा के साथ कर रहे खिलवाड, नहीं हो रही कार्रवाई
राकेश बिकुन्दीया, सुसनेर। अवैध उत्खनन करने वाले खनन माफिया शासन को करोड़ों का चूना लगाकर चांदी काट रहे हैं। ऐसे में माफियाओं की बल्ले-बल्ले हो रही है। क्षेत्र में बिना अनुमति के कई जगह अवैध उत्खनन किया जा रहा है। नदियों से रेत और बंजर जमीनों से मुरम निकालकर बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि एसडीएम कार्यालय से कुछ ही दूरी पर खनन माफियाओं ने खनन करके मुरम को बेच डाला है। क्षेत्र की कंठाल नदी, अहु नदी, कालीसिंध नदियों से रेत व तालाबों से मिट्टी भी बेरोकटोक बेची जा रही है। इसकी न तो कोई रॉयल्टी भरी जाती है और न ही किसी प्रकार की खनन की अनुमति ली जाती है। जिसकी जब मर्जी हो खोदकर कर ले जाते है। खनिज विभाग और राजस्व विभाग द्वारा इस ओर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। नतीजा ये हो रहा है कि रात और दिन में धड़ल्ले से खनन चल रहा है।
डग रोड पर सड़क किनारे ही कर दी खुदाई
एसडीएम कार्यालय के सामने से ही डग-जीरापुर राष्टीय राजमार्ग 725 बी गुजर रहा है। इस पर शासकीय आईटीआई कॉलेज और एसडीएम कार्यालय के बीच दोनो शासकीय भवनो से करीब 500 मीटर की दूरी पर ही माफियाओ के द्वारा सड़क किनारे जगह-जगह शासकीय जमीन पर अवैध तरीके से खुदाई करके मुरम को बेच दिया गया है। आपको बता दे की इस मार्ग पर नगर परिषद का ट्रेचिंग ग्राउंड भी स्थित है।
नदियों की स्थिति दयनीय
क्षेत्र की नदियों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। नदियों में पोकलेन, जेसीबी मशीने लगाकर बंडा व रेत निकालने का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है। नदियों में थोड़ी-थोड़ी दूर जाली लगाकर रेत छानी जा रही है। नदियों से रेत व पहाडो एवं बंजर जमीनों से निकाली जा रही मुरम अशासकीय सहित शासकीय निर्माण स्थलों पर भी खुलकर बेची जा रही है।
पर्यावरण पर भी खतरा
पर्यावरण संरक्षण में जितना महत्व नदियों का है, उतनी ही अहम भूमिका पेड़-पौधों और पहाड़ों की भी है। लेकिन यहां न केवल नदियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, बल्कि अवैध उत्खनन से पेड़-पौधों और पहाड़ों पर भी आफत आन पड़ी है। इस चौतरफा मार से पर्यावरण संकट का खतरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
अवैध उत्खनन को लेकर जांच करवाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर मुरम और रेत का खनन करने वाले लोगो को उचित कार्रवाई की जाएगी।
सर्वेश यादव, एसडीएम, सुसनेर।
