आज महाशिविरात्रि पर लगेगा मेला, दर्शन करने दूर-दराज से पहुंचेंगे श्रृद्धालु
राकेश बिकुन्दीया, सुसनेर। मध्य प्रदेश के आगर मालवा ज़िले के सुसनेर नगर से 10 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में विध्यांचल पर्वत श्रृंखला पर अतिप्राचीन पंच देवलिया (पंचदेहरिया) महादेव मंदिर स्थित है। जो की पांडवकालीन है, मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस मंदिर का निर्माण किया था। इस मंदिर को पांडवों ने एक ही लाल रंग के पत्थर से बनाकर के यहा पर महाकाल के स्वरूप जैसे शिवलिंग की स्थापना की थी। यह मंदिर श्रृद्धालुओ की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर यहा पर एक दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है।
साहित्यकार सुसनेरी की नजर में मंदिर
शहर के वरीष्ठ व वयोवृद्ध साहित्यकार एवं कवि डॉक्टर रामप्रताप भावसार सुसनेरी बताते है की महाभारत काल में अज्ञात वास के दोरान पांचो ही पांडव अपनी माता देवी कुंति के साथ यहा रूके थे। विध्यांचल पर्वत श्रृंखला होने के कारण उन्है यह स्थान काफी पंसद आया और उसके बाद पहाडी की एक शिला को खुरेदकर के भीम ने यहां पर एक विशाल शिवलिंग का निर्माण किया। उसके बाद आसपास 4 और अन्य देवी-देवता की स्थापना की। चुकी इसकी स्थापना 5 पंडावो ने की थी और यहां पर पांच देव स्थापित है। इसलिए इसका नाम पंचदेहरीया पढ गया। ग्रामीण अंचल के कुछ लोग इसे मालवी भाषा में पंच देवलिया भी पुकारते है। इस मंदिर की स्थापना के बाद पांडव नलखेडा पहुंचे थे और यहां पर शक्तिपीठ मां बगलामुखी की स्थापना की थी।
साधु संतो ने तपस्या कर बताया यहा का महत्व
पिछले कुछ सालो से पंच देहरीया का यह स्थान पर सांधु संतो की तपस्या स्थली बना हुआ है। कई सालो से चित्रकुट के संत शिवरामानंद जी महाराज और स्वामी दयानंद जी आश्रम संचालित करते हुएं आसपास के ग्रामीण अंचल के युवाओं को धर्म का पाठ भी पढा रहे है। पहाडी पर स्थित होने की वजह से यह मंदिर पर्यटन के लिहाज से भी लोगो की पसंद बना हुआ है। मंदिर में विराजित शिवलिंग भगवान महाकाल के स्वरूप का है। जो हर साल तील के समान बढता है।
मंदिर की खास बातें
इस मंदिर में शिवलिंग भी उसी लाल रंग के पत्थर से बना है।
इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है।
इस मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर एक दिवसीय मेला लगता है।
सावन के महीने में यहां शिव जी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
इस मंदिर के पास ही पांडवों ने रहने के लिए कुछ गुफाएं भी बनाई थी जो आज भी सहस्यमयी है।
इस मंदिर का शिखर भी उसी पत्थर का बना हुआ है जिस पत्थर से मंदिर।
कहा जाता है कि भीम ने अपनी शक्ति के बल पर लाल रंग के एक ही पत्थर को तराशकर मंदिर का निर्माण किया था।
इस मंदिर में जो कुछ भी हुआ, उसमें प्रशासन की जगह जनसहयोग की भूमिका ज्यादा रही है।आसपास के करीब 30 गांवो की समिति बनी हुई है जिन्होने यहां रात्रि के समय भजन कीतर्न, सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजन की शुरूआत की तो मंदिर के आसपास रात्रि के समय होने वाली आपराधिक गतिविधियो पर विराम लग गया। मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित कराने के उदे्श्य से शिवशक्ति कावड यात्रा समिति के बेनरतले प्रतिवर्ष श्रावण मास में पंचेदह्ररिया महादेव का जलाभिषेक करने के लिए मनकामनेश्वर मंदिर से कावड व कलश यात्रा भी निकाली जाती है।
