राकेश बिकुन्दिया, सुसनेर। महिला हो, रहने दो…तुमसे नहीं हो पाएगा… यह जुमला आपने समाज में कई बार सुना होगा। लेकिन आधी आबादी ने तुमसे ना हो पाएगा की सभी बेड़ियों को तोड़कर आसमां की नई बुलंदियां छुई हैं। नारी शक्ति ने साबित किया है, वह अबला नहीं सबला है। वह भक्ति है और वह ही शक्ति भी। चाहे आत्मरक्षा का मामला हो या फिर स्वास्थ्य या रोजगार का क्षेत्र हो, कहीं भी नारियां पीछे नहीं है। कंधे से कंधा मिलाने के बाद अब नारियां दो कदम आगे बढ़कर नए प्रतिमान गढ़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हम ऐसे ही महिला किरदारों को आपसे रूबरू करा रहे हैं, जिनकी कहानियां जहां महिलाओं को संबल और प्रोत्साहन देती हैं, वहीं पुरुष समाज को भी आईना दिखा रही हैं।

सीएम राईज की बसो में कन्डक्टर का काम कर रही महिलाएं– नारी शक्ति भी हर क्षेत्र में पुरूषो की बराबरी कर रही है। इसका जीता जागता उदाहरण सुसनेर का सीएम राईज स्कूल है। दरअसल सीएम राईज स्कूल में संचालित होने वाली बसो में कन्डक्टरी का काम महिलाएं कर रही है। वे बच्चो को गांवो से स्कूल तक लाने व छुट्टी हो जाने के बाद वापस घर तक छोडने की जिम्मैदारी बखूबी निभा रही है। ग्रामीण अंचल की करीब 8 गांवो की महिलाएं इन बसों पर कंडक्टरी का काम कर रही है। इनमें पवित्रा बाई, सीमा बाई, अनिता यादव, सोरम बाई, गुड्डी बाई, पूजा बाई, पूनम बाई, कृष्णा बाई शामिल है। तस्वीर में बस ड्राइवर के साथ ये महिलाएं शामिल है।

स्वर्णा जैन ने कराटे में हासिल किया कीर्तिमान
महज 18 साल की उम्र में ही सुसनेर की स्वर्णा जैन ने कराटे में कीर्तिमान हासिल कर लिया है। इनती सी उम्र में उन्होने शहर से लेकर स्टेट और अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर अपने हुनर से सिल्वर मेडल हासिल किया है। वर्तमान में स्वर्णा इंदौर से बीटेक की पढाई कर रही है। स्वर्णा जैन सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी सरकारी स्कूलो की बालिकाओ को देती है। उन्होने इस सफलता से न िसर्फ अपने माता-पिता का नाम राेशन किया है बल्की शहर को भी गोरवान्वित किया है।

दुर्गावाहिनी की बहने भी किसी से कम नहीं
पाश्चात्य संस्कृति को छोडकर अपनी भारतीय संस्कृति का गौरव बढाने वाली नारी शक्ति भी हमारे शहर में मौजूद है। दुर्गावाहिनी की ऐसी कई बहने शहर में है जो तलवारे घुमाने के अलावा अखाडो में भी अपने हुनर का प्रदर्शन करती है। वर्ष में एक बार दुर्गावाहीनी का पथ संचलन भी निकाला जाता है। जो हमारे शहर को गौरवान्वित करता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टर नीलम जैन दे रही सेवा
डॉक्टर नीलम जैन, शहर की ही बेटी है और जो सुसनेर में ही पलीबडी और अब 27 साल की उम्र में एमबीबीएस बनकर सुसनेर के ही शासकीय सिविल अस्पताल में ही डॉक्टर बन सेवा दे रही है। वे इमरजेंसी के अलावा दिन और रात में भी मरीजो को परामर्श दे रही है। जब कभी आकस्मिक दुर्घटना का केस आता है तो उसमें डॉक्टर नीलम जैन की भूमिका हमेशा सराहनीय रही है। वे प्रसूति वार्ड में गर्भवती महिलाओं व एनआरसी में बच्चों को भी उचित परामर्श भी दे रही है।

महिला टीआई के भरोसे है नगर व 76 गांवो की सुरक्षा
सुसनेर नगर एवं इससे जूडे 76 गांवो की सुरक्षा की जिम्मैदारी भी थाना प्रभारी केसर राजपूत के भरोसे है। जो एक महिला है। 56 वर्ष की आयु में केसर राजपूत बखूबी अपनी जिम्मैदारीयों का निर्वहन कर रही है। चाहे क्राइम पर अंकुश लगाना हो या फिर कोई दुर्घटना में पीडितो की मदद का मामला है। केसर राजपूत तत्काल प्रभाव से अपनी पूरी टीम के साथ मैदान में दिखाई देती है।

