राकेश बिकुन्दिया # मालवा खबर@ सुसनेर। यदि आप उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 552 जी से यात्रा कर रहे है तो सावधान हो जाइऐ, क्येां कि इस मार्ग के किनारे लगे संकेतक बोर्ड आपको आपकी मंजिल से भटका सकते है। ऐसा हम नहीं बल्की एनएचएआई के द्वारा लगाए गए संकेतक बोर्ड बोल रहे है। दरअसल में सुसनेर से आगर की और 3 किलोमीटर की दूरी पर नवोदय के सामने गुर्जर खेडी गांव का बोर्ड लगा हुआ है जो की इस मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों को भटका रहा है। क्यों कि जिस पश्चिम दिशा की और तीर का निशान बनाकर के यह बोर्ड लगाया गया है वहां पर गुर्जर खेडी नाम का कोई गांव ही नही है। ऐसे में यह बोर्ड यात्रियों और वाहन चालको को भ्रमित कर रहा है। यह बोर्ड आज से नहीं बल्की जब से उज्जैन-झालावाड राष्ट्रीय राजमार्ग बनकर के तैयार हुआ है तब से लगा हुआ है। लेकिन मंगलवार को यह सुर्खियों में आ गया। जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नई दिल्ली की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड कर दिये।

गुर्जर खेडी नहीं बल्की आकली जाता है रास्ता
इस मार्ग पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की एक नही बल्की अनेको गलतिया ऐसी है जिससे यात्री चुकला रहे है। चाहे वह पुल-पुलियाओ का अधुरा निर्माण हो या फिर संकेतक बोर्ड के मामले हो। जिम्मैदारों ने नवोदय विद्यालय के पास गुर्जर खेड़ी का संकेत बोर्ड लगा दिया गया। लेकिन जब आप इसके भरोसे से गांव की और जाते हे तो गुर्जखेडी नहीं बल्की आकली पहुंच जाते है। क्यों कि यहां पर आकली ही बसा हुआ है।

स्थानीय प्रशासन अनजान
गुर्जरखेडी का गलत संकेतक बोर्ड लगाने में किसकी गलती है इसमें इंजीनियर की गलती माने या फिर एनएचएआई के द्वारा जिस कम्पनी को ठेका दिया गया था उस जीएचवी कम्पनी की। इसमें सबसे बडा सवाल यह भी उठता है की इस पूरे मामले से स्थानीय प्रशासन अभी तक अनजान बना हुआ है। जबकि इस संकेतक बोर्ड के कारण अनेको यात्री अपनी मंजिल से भटक चुके है। जाने माने यात्री इस बोर्ड को लगाने पर सम्बंधित इंजीनियर को कोसते हुए नजर आ रहे है।
SDM सर्वेश यादव का कहना है कि NHAI के जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाकर के इस बोर्ड को हटाकर आकली गांव का बोर्ड लगाने के लिये बोला जायेगा। आगे से ऐसी लापरवाही न हो इसकी भी समझाईष दी जाएगी।

